अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस: बुजुर्गों का सम्मान

बुजुर्गों का सम्मान

न करना कभी बुजुर्गों का अपमान
वह हैं हमारे परिवार की “आन बान और शान” !
आज हम जो भी है वह सब हमारे बुजुर्गों की ही देन है। हमें इस धरती पर लाने वाले भी वही हैं और हमें पाल पोस्कर बड़ा करने वाले भी वहीं हैं। फिर चाहे वह हमारे माता पिता हो या दादा दादी परदादा परदादी ही क्यों न हो। हमें इन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए।
जिस दिन से बच्चा इस संसार में आता है ,उसी दिन से हमारी क्रियाएं आरंभ हो जाती हैं।
और साथ ही साथ हमारे बड़े बुजुर्गों की शिक्षाएं भी,
जो वो हमें देते हैं, उनकी मेहनत, जिस तरह वो हमें पालते हैं।
आज चर्चा करते हैं हम अपने बुजुर्गों के परिश्रम की।
कि किस तरह से उन्होंने हमें खड़ा किया है और एक अच्छा इंसान बनाया है:

बुर्जुगों के संस्कार
आज हम जो भी अच्छा काम करते हैं वो कही न कही हमारे संस्कारों से ही जुड़े होते हैं जो कि हम अपने बड़ों से सीखते आए हैं। चाहे वो किसी कहानी के रूप
में या अच्छी आदतों से, या उनके द्वारा दी गई शिक्षा से।

बुजुर्गों से इतिहास
कहते हैं कि इतिहास पन्ने पलटता है। हमारे अंदर
जो भी गुण दिखाई देते हैं वह हमारे अपने बुजुर्गों के ही होते हैं।वह किसी न किसी तरह से हमारे कार्यों, आदतों, शिक्षाओं और रीतिरिवाज, संस्कारों में नज़र आते हैं। हम उन्हीं से पहचाने जाते है।

बुजुर्गों से सीख
हमें अपने बुजुर्गों को देखकर बहुत कुछ सीखने के अवसर मिलते हैं।हमें उन अवसरों को उनकी बातों की अवहेलना करके नहीं गवाना चाहिए बल्कि उनकी बात को ध्यान से सुनकर उसे अपना कर उसका लाभ लेना चाहिए। क्यों कि उन्होंने दुनिया हमसे ज्यादा देखी है और बहुत करीब से परिस्थितियों को पहचाना है तथा उनके साथ समायोजित करके हमें पाला है।

बुजुर्गों के अनुभव
हमारे और उनके समय में जमीन आसमान का अंतर
हो गया है । उन्होंने हर कार्य को अपने हाथों से किया है। हर परेशानी को झेला है। वह अपने अनुभवों से बहुत कुछ सीखे है और हमें भी सिखाते हैं। जिससे कि हमें अपने जीवन में किसी भी मुश्किल का सामना न करना पड़े और यदि कोई संकट आ भी जाए तो उसे कैसे पार करना है। यह हम उनके अनुभवों द्वारा जान सकते हैं।

बुजुर्ग और आज की पीढ़ी
बहुत फर्क हो गया है आज की पीढ़ी और हमारे बुजुर्गों में।उनका जमाना था चिट्ठी पत्री का, कोई भी काम बिना किसी मशीन की सहायता से करने का। पर अब डिजिटल भारत बन गया। हम हर चीज मशीन से करने लगे हैं । उनके पास अपनो के सुख दुख के लिए समय निकल जाता था और आज की पीढ़ी मशीन के साथ भी समय नहीं निकल पाती क्योंकि दुनिया बहुत तेजी से भाग रही है। जितना हो सके हमें उनके लिए समय जरूर निकालना चाहिए।

बुजुर्गों की जरूरतें
हमें अपने बड़े बुजुर्गों की जरूरतें समझने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। हमें उनकी जरूरत और इच्छाओं का सम्मान और उन्हें पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। वह अधिक उम्र होने की वजह से अब स्वयं से कुछ नहीं कर सकते और इसीलिए हमें उनका सहारा बनना हमारा कर्तव्य है।उन्होंने अपने हमारे प्रति सभी कार्यों को भलीभांति निभाकर हमें एक अच्छा परिपूर्ण इंसान बनाया अब बारी हमारी है अपना कर्तव्य निभाने की। चाहे हम आप अपने जीवन में कितने ही व्यस्त क्यों न हो पर हमें अपने बड़े बुजुर्गों की सेवा करके उनका आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए।

इस प्रकार बुजुर्ग ही हमारे परिवार रूपी पेड़ की मुख्य जड़ हैं जिसे हमें अपने प्यार, विश्वास और सम्मान रूपी जल से सींचते रहना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस की आप सभी को

हार्दिक शुभकामनाएं।


हेमा सिन्हा