झिलमिलाते रास्ते, बिखरते सपने, संकलनकर्ता: उत्कर्ष कुशवाहा
₹325.00
आकर्षक संभावनाओं से भरी दुनिया हर व्यक्ति को अपने सपनों की ओर बढ़ने का साहस देती है। चमकते अवसर, बेहतर भविष्य की उम्मीद और सफलताओं के मोहक चित्र मन में अनेक आकांक्षाएँ जन्म देते हैं। लेकिन जीवन का सत्य केवल सपनों की उड़ान नहीं, बल्कि उन रास्तों की कठिनाइयाँ भी है जहाँ परिस्थितियाँ, सामाजिक दबाव, असफलताएँ और समय की कठोरता कई बार इंसान को भीतर तक तोड़ देती हैं।
यह कृति उसी संवेदनशील यथार्थ का सजीव चित्रण है- जहाँ उम्मीदें जन्म लेती हैं, संघर्षों से टकराती हैं, भ्रमों में उलझती हैं और कभी-कभी टूटकर बिखर भी जाती हैं। हर रचना मनुष्य के भीतर चल रहे उस मौन द्वंद्व को शब्द देती है, जिसमें एक ओर सपनों को बचाए रखने की जिद है और दूसरी ओर जीवन की कठोर सच्चाइयों का बोझ।
लेखक ने मानवीय भावनाओं की गहराइयों को अत्यंत संवेदनशीलता से उकेरा है। यह केवल टूटते सपनों की कहानी नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, धैर्य, संघर्ष और स्वयं को पुनः खोजने की यात्रा भी है। कहीं निराशा की धुंध है, तो कहीं उम्मीद की हल्की किरण; कहीं रिश्तों की उलझनें हैं, तो कहीं अपने अस्तित्व को समझने की कोशिश।
यह पुस्तक पाठकों को अपने जीवन के उन अनकहे अनुभवों से जोड़ती है, जिन्हें वे अक्सर शब्द नहीं दे पाते। हर पृष्ठ एक ऐसा आईना बन जाता है जिसमें समाज, परिस्थितियाँ और मनुष्य की आंतरिक संवेदनाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।
यह कृति केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए है-एक ऐसी भावनात्मक यात्रा, जो पाठकों को सोचने, ठहरने और जीवन के वास्तविक अर्थ को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।
Description
आकर्षक संभावनाओं से भरी दुनिया हर व्यक्ति को अपने सपनों की ओर बढ़ने का साहस देती है। चमकते अवसर, बेहतर भविष्य की उम्मीद और सफलताओं के मोहक चित्र मन में अनेक आकांक्षाएँ जन्म देते हैं। लेकिन जीवन का सत्य केवल सपनों की उड़ान नहीं, बल्कि उन रास्तों की कठिनाइयाँ भी है जहाँ परिस्थितियाँ, सामाजिक दबाव, असफलताएँ और समय की कठोरता कई बार इंसान को भीतर तक तोड़ देती हैं।
यह कृति उसी संवेदनशील यथार्थ का सजीव चित्रण है- जहाँ उम्मीदें जन्म लेती हैं, संघर्षों से टकराती हैं, भ्रमों में उलझती हैं और कभी-कभी टूटकर बिखर भी जाती हैं। हर रचना मनुष्य के भीतर चल रहे उस मौन द्वंद्व को शब्द देती है, जिसमें एक ओर सपनों को बचाए रखने की जिद है और दूसरी ओर जीवन की कठोर सच्चाइयों का बोझ।
लेखक ने मानवीय भावनाओं की गहराइयों को अत्यंत संवेदनशीलता से उकेरा है। यह केवल टूटते सपनों की कहानी नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, धैर्य, संघर्ष और स्वयं को पुनः खोजने की यात्रा भी है। कहीं निराशा की धुंध है, तो कहीं उम्मीद की हल्की किरण; कहीं रिश्तों की उलझनें हैं, तो कहीं अपने अस्तित्व को समझने की कोशिश।
यह पुस्तक पाठकों को अपने जीवन के उन अनकहे अनुभवों से जोड़ती है, जिन्हें वे अक्सर शब्द नहीं दे पाते। हर पृष्ठ एक ऐसा आईना बन जाता है जिसमें समाज, परिस्थितियाँ और मनुष्य की आंतरिक संवेदनाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।
यह कृति केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए है-एक ऐसी भावनात्मक यात्रा, जो पाठकों को सोचने, ठहरने और जीवन के वास्तविक अर्थ को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।
Additional information
| Weight | 0.200 g |
|---|---|
| Dimensions | 15 × 0.5 × 21 cm |






