शिवोऽहम्: भूला हुआ सत्य, लेखिका: श्रद्धा तिवारी
Original price was: ₹415.00.₹335.00Current price is: ₹335.00.
शिवोऽहम्: भूला हुआ सत्य
क्या आपने कभी स्वयं से पूछा है- “मैं वास्तव में कौन हूँ?”
नाम, रिश्ते, करियर, उपलब्धियाँ, जिम्मेदारियाँ और दुनिया की अपेक्षाएँ- हम जीवन भर इन्हीं के बीच अपनी पहचान बनाते रहते हैं। लेकिन जब इन सबके बावजूद भीतर कोई खालीपन रह जाए, जब सफलता भी स्थायी सुकून न दे पाए, तब शायद एक नई यात्रा शुरू होती है- बाहर से भीतर की ओर।
“शिवोऽहम्: भूला हुआ सत्य” ऐसी ही एक आत्म-खोज और जागरण की यात्रा है। यह पुस्तक आपको कोई नई पहचान देने का प्रयास नहीं करती, बल्कि उन परतों के पीछे देखने का निमंत्रण देती है जिन्हें समय के साथ हमने स्वयं पर ओढ़ लिया है- भय, अपेक्षाएँ, भूमिकाएँ, असफलताएँ और दूसरों की स्वीकृति की चाह। पुस्तक की मूल यात्रा पाने की नहीं, बल्कि स्मरण करने की यात्रा है।
“कौन हूँ मैं?” से आरंभ होकर यह यात्रा मौन साक्षी, मन के शोर, अपेक्षाओं की कैद, जीवन के टूटने, अंधकार से आत्मबोध, मृत्यु से मिली सीख, छोड़ देने की कला और आत्मा की आवाज़ से गुजरते हुए अंततः “शिवोऽहम्” के गहरे अर्थ तक पहुँचती है।
यहाँ शिवोऽहम् कोई श्रेष्ठता की घोषणा नहीं, बल्कि एकत्व का स्मरण है- उस चेतना को पहचानना, जो हर परिवर्तन के पीछे शांत रूप से उपस्थित है। सरल आत्मचिंतन, जीवन से जुड़े अनुभवों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से यह पुस्तक पाठक को केवल अध्यात्म पढ़ने नहीं, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन में जीने की ओर ले जाती है। शायद जिस सत्य को आप इतने समय से बाहर खोज रहे हैं, वह कभी आपसे दूर था ही नहीं। शायद आप बस उसे भूल गए थे।
अब समय है- स्मरण का।
शिवोऽहम्।
Description
शिवोऽहम्: भूला हुआ सत्य
क्या आपने कभी स्वयं से पूछा है- “मैं वास्तव में कौन हूँ?”
नाम, रिश्ते, करियर, उपलब्धियाँ, जिम्मेदारियाँ और दुनिया की अपेक्षाएँ- हम जीवन भर इन्हीं के बीच अपनी पहचान बनाते रहते हैं। लेकिन जब इन सबके बावजूद भीतर कोई खालीपन रह जाए, जब सफलता भी स्थायी सुकून न दे पाए, तब शायद एक नई यात्रा शुरू होती है- बाहर से भीतर की ओर।
“शिवोऽहम्: भूला हुआ सत्य” ऐसी ही एक आत्म-खोज और जागरण की यात्रा है। यह पुस्तक आपको कोई नई पहचान देने का प्रयास नहीं करती, बल्कि उन परतों के पीछे देखने का निमंत्रण देती है जिन्हें समय के साथ हमने स्वयं पर ओढ़ लिया है- भय, अपेक्षाएँ, भूमिकाएँ, असफलताएँ और दूसरों की स्वीकृति की चाह। पुस्तक की मूल यात्रा पाने की नहीं, बल्कि स्मरण करने की यात्रा है।
“कौन हूँ मैं?” से आरंभ होकर यह यात्रा मौन साक्षी, मन के शोर, अपेक्षाओं की कैद, जीवन के टूटने, अंधकार से आत्मबोध, मृत्यु से मिली सीख, छोड़ देने की कला और आत्मा की आवाज़ से गुजरते हुए अंततः “शिवोऽहम्” के गहरे अर्थ तक पहुँचती है।
यहाँ शिवोऽहम् कोई श्रेष्ठता की घोषणा नहीं, बल्कि एकत्व का स्मरण है- उस चेतना को पहचानना, जो हर परिवर्तन के पीछे शांत रूप से उपस्थित है। सरल आत्मचिंतन, जीवन से जुड़े अनुभवों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से यह पुस्तक पाठक को केवल अध्यात्म पढ़ने नहीं, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन में जीने की ओर ले जाती है। शायद जिस सत्य को आप इतने समय से बाहर खोज रहे हैं, वह कभी आपसे दूर था ही नहीं। शायद आप बस उसे भूल गए थे।
अब समय है- स्मरण का।
शिवोऽहम्।
Additional information
| Weight | 0.300 g |
|---|---|
| Dimensions | 15 × 1 × 21 cm |






