अरावली: 100-मीटर का विलोपन, संकलनकर्ता: विपिन वि. कांबळे
₹250.00
“अरावली: 100-मीटर का विलोपन” एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक कृति है, जो प्रकृति और मानव के बीच टूटते संतुलन को उजागर करती है। यह पुस्तक हमें यह समझने का अवसर देती है कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी केवल बड़े आंदोलनों या नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की छोटी-छोटी संवेदनशीलताओं, जागरूक व्यवहार और सामूहिक प्रयासों में भी निहित है।
इस पुस्तक की प्रत्येक पंक्ति पाठक के हृदय को स्पर्श करती है और उसे आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है- क्या हम वास्तव में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व में जी रहे हैं, या केवल अपने स्वार्थों के लिए उसे नष्ट कर रहे हैं? सरल भाषा और गहरी भावनाओं के माध्यम से यह कृति उस सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ विकास और विनाश के बीच की रेखा बेहद सूक्ष्म हो जाती है।
“अरावली: 100-मीटर का विलोपन” केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने, समझने और अपने जीवन में उतारने के लिए लिखी गई है- ताकि हर पाठक प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचान सके और इस धरती को थोड़ा और संवेदनशील, थोड़ा और सुरक्षित बना सके।
Description
“अरावली: 100-मीटर का विलोपन” एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक कृति है, जो प्रकृति और मानव के बीच टूटते संतुलन को उजागर करती है। यह पुस्तक हमें यह समझने का अवसर देती है कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी केवल बड़े आंदोलनों या नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की छोटी-छोटी संवेदनशीलताओं, जागरूक व्यवहार और सामूहिक प्रयासों में भी निहित है।
इस पुस्तक की प्रत्येक पंक्ति पाठक के हृदय को स्पर्श करती है और उसे आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है- क्या हम वास्तव में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व में जी रहे हैं, या केवल अपने स्वार्थों के लिए उसे नष्ट कर रहे हैं? सरल भाषा और गहरी भावनाओं के माध्यम से यह कृति उस सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ विकास और विनाश के बीच की रेखा बेहद सूक्ष्म हो जाती है।
“अरावली: 100-मीटर का विलोपन” केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने, समझने और अपने जीवन में उतारने के लिए लिखी गई है- ताकि हर पाठक प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचान सके और इस धरती को थोड़ा और संवेदनशील, थोड़ा और सुरक्षित बना सके।
Additional information
| Weight | 0.250 g |
|---|---|
| Dimensions | 15 × 0.5 × 21 cm |





